
गजरा | Gajra
samedi 17 octobre · 17h30 – 19h
🗣️anglais
पुरानी चिट्ठियों और मोगरे की ख़ुशबू से बुनी प्रेम, बिछड़न और इंतज़ार की कहानी — अपूर्वा और अभय के साथ।
कुछ ख़ुशबू कभी मुरझाती नहींकुछ रिश्ते वक़्त के साथ ख़त्म नहीं होते, बस चिट्ठियों में बंद होकर रह जाते हैं।"गजरा" एक ऐसी कहानी है जो पुरानी चिट्ठियों, एक धुंधली तस्वीर और मोगरे की उस ख़ुशबू के इर्द-गिर्द बुनी गई है जो बरसों बाद भी यादों में ताज़ा है। यह प्रेम, बिछड़न और इंतज़ार की कहानी है। एक ऐसा सफ़र जो दिल को छूता है और आँखें नम कर जाता है।आइए,अपूर्वा एवं अभय के साथ एक शाम कहानियों के नाम करें, जहाँ शब्द ही दृश्य बनेंगे और एहसास ही संगीत।
